बहुत कम समय में ,बहुत ज़्यादा नाम कमाया था , उन्होंने...!!! इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा मिलेगा...! बिहार का गौरव - बिहार पर गर्व बना रहेगा ! जो अपनी रचनात्मकताओं को बारम्बार , अपनी क़ाबिलियाती के साथ टी.वी. के पर्दे और सिनेमाओं के पर्दों पर साबित करता हुआ ; हमें याद दिलाता रहेगा ! वह 'पंचतत्व' में विलीन होकर भी अपनी कृतित्व से अमर हो गया है ! वह आने वाले कई दशकों तक इक 'प्रेरणा' स्वरूप बन गया है ! पृथ्वी उसे मिटने न देगी और अपने कर्मों से वह हमें रह - रहकर 'याद' आएगा ! इन्हीं शब्दों के साथ 'ईश्वर' से 'कामना' करता हूँ कि , उस प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता एवं नायक "सुशांत सिंग राजपूत" की आत्मा को शांति प्रदान करें...!!! ॐ शाँति...,ॐ शाँति, ॐ शाँति...!!!
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जुलाई 8, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
“ बचपन के दिन ”
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“ बचपन के दिन ” कहाँ गए बचपन के दिन, खुले आकाश के नीचे, दीवारें और दरीचे! दौड़ा था – पछाड़ा था - पिरोया था, अनगिनत चाहतों को, लथ – पथ पसीनों में... ‘बिड़ला मंदिर’ की सुबह 'सब्ज़िबाग़' की शाम ‘हमजोली’ में, अटकेलियों में रूठने – पढ़ने – खेलने, ‘मछुआटोली’ में ! या ‘भंवरपोखर’ की गलियों में... कटी हुई पतंग लूटने, केले, कदम, निमकौड़ी बाँचने...! सदाबहार - ख़ुशनुमा अंदाज़ , ‘दशहरा’–‘दिपावली’–‘होली’ में ! न ‘भाषा’ थी - कोई विरोध था, हमलोगों में ‘प्रमोद’ था ! लिखने-पढ़ने और ख़ाबों को बुनानें में, ‘चाशनी’ में डुबोयी, क्लासेज़ की ‘फुलझड़ियों’ में...! बचाया कुछ भी न था , ‘झोली’ ख़ाली थी ! एक ही जान ..., एक ही साँस बनकर जी रहे थे...! अपनी - अपनी उमंग में, ‘वर्ज़िशें' भी ख़ूब की थी - हमनें, तेज़ क़दमों से चलकर, ‘गाँधी-संग्रहालय’ के क़रीब, उस पार्क में...! क्या ‘मुनासिब’ नहीं है - अभी..., उन्हें याद की जाए...? क्यों न , हम आज के 'रिक...
जिंगपिंग - जंपिंग जपाक - जपाक
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जिंगपिंग - जंपिंग जपाक - जपाक, पीछे मुड़ गए तपाक - तपाक ! उनसठ ऐप्प का चूना लग गया, थप्पड़ गूँजे रपाक - रपाक !! जिंगपिंग - जंपिंग जपाक - जपाक, पीछे मुड़ गए तपाक - तपाक.... काले धन्धे गोरे लोग, अपने सर पे फोड़ ले तोप ! बहिष्कार है , दुनियां भर में ख़ून के आँसू रो ले कोप !! दादागिरी नहीं चलेगी, राफ़ेल उड़ेगा सपाक - सपाक... जिंगपिंग - जंपिंग जपाक - जपाक, पीछे मुड़ गए तपाक - तपाक.... बुहान लैब भी टूटेगा, घड़ा पाप का फूटेगा ! तेरी हड़पनीति से ही , जनगण से भी छूटेगा !! कम्युनिस्ट की तू कलंक ज़ात है, नियत तेरी नापाक - नापाक... जिंगपिंग - जंपिंग जपाक - जपाक, पीछे मुड़ गए तपाक - तपाक.... अब तो नया ही भारत है फ़ूटी तेरी क़िस्मत है ! मिट्टी में तू मिल जाएगा जैसी तेरी फ़ितरत है !! माँ काली...