संदेश

नवंबर 14, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मुद्दत बाद किसी ने....

 मुद्दत बाद किसी ने,  मिरे दीदों में आके झाँका, यूँ समझो यारो मुझे, 'लाखों - करोड़ों' में आँका ! जाहे क़िस्मत मिरे दिल की बातें , सुहानी शाम और उनकी सौग़ातें अभी ताज़ी थी जैसे मिरी कहानियां, उनकी 'तड़प' में 'तलब' बढ़ातें हिली ज़मीं भी थी, आसमाँ आँका - बाँका... यूँ समझो यारो मुझे, 'लाखों - करोड़ों' में आँका !            मुद्दत बाद किसी ने,               मिरे दीदों में आके झाँका... ख़त्म हुई थी कहकहे - हर बंदिश, जो रचाई ग़ैरों ने तंग दिल से रंजिश! ख़ुदा बचाए मिले न कभी किसी को..., मुक़ाम - ए - हक़ में बनी - बनाई थी साज़िश बोलता था मिरे लिए, चौराहे - हर नाका यूँ समझो यारो मुझे, 'लाखों - करोड़ों' में आँका !            मुद्दत बाद किसी ने,             मिरे दीदों में आके झाँका... ज़िंदादिली थी ,  उनकी लबों में भी, थी ख़ुशबू हुए बाग़ -  बाग़ उनसे, हुए जो हम कल उनसे रूबरू टिमटिमाती रोशनी की आतिशबाज़ियाँ बलखाती आई, कुछ करती गुफ़्तगू रफ़्तार-ए- हस्र को भागती गश्त ने ...

माँ ऐसी ही होती है...,

  माँ ऐसी ही होती है..., आँखें खोले सोती है...! कुछ भी वो बनाए खिलाए, अमृतमयी सी होती है ! उसके आँचल की महक में, हर पीड़ा जा खोती है...!                              माँ ऐसी ही होती है.... जिसकी गोद बड़ी सुखदायी, हम कहते थे 'माई - माई'...! जिम्मा भक्ति,और सलीके, धीरज,बोली, हिम्मत, सीखें, सब कुछ हममें बोती है !                                माँ ऐसी ही होती है.... रूठ गए तो झींगा मुश्ती, मुझे मनाने करती कुश्ती...! मेरे पग - पग, हर शैतानी, कर देती वो पानी - पानी...! थक जाने - बोझिल होने पर, तन्मयता सँजोती है...!                      माँ ऐसी ही होती है.... -- देवाशीष सरकार