संदेश

वो कहते हैं...

वो कहते हैं,  वो हमारे, हम उनके नहीं हैं...!  कोई उनको समझाए  हम कब से वहीं के वहीं हैं ...!!  यह कैसी  नासमझी-ओ-मदहोशी  छाई है...!  क्या तिरे दिल ने कोई और जगह भी पाई है...???  यूं तो सदियों से तुमसे भाई का रिश्ता है  पर क्यूँ आज  कौन तुम्हैं खींचता है  अपनी नादानियों से  हवा का रूख़ मत मोड़ो ग़र भाई समझे हो तो अपने ईमान को अब जोड़ो -- देवाशीष सरकार

"सर्द सुबह" -- देवाशीष सरकार

सर्द सुबह की बात  कुछ अलग सी होती है...  धड़कनें मंद होती हैं,  और रह रहकर कहती हैं...  हवा में साज़ उभरते हैं कहीं से आस गाती है...  हमीं से हमको छीनें पर कहो तो, हामी भरती है...  सर्द सुबह की बात  कुछ अलग सी होती है...  -- देवाशीष सरकार

छठ पूजा का वास्तविक महत्व क्या है?

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष के षष्ठी को छठ पूजा मनाया जाता है , जिसे छठ पर्व या सूर्यषष्‍ठी व्रत की पूजा भी कहते हैं , यह एक आस्था का बड़ा पर्व है। जिसकी शुरुआत दीपावली के 6 दिनों बाद की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 'षष्ठी देवी' को लोकभाषा में 'छठ माता' कहा जाता है, जो ऋषि 'कश्यप' तथा 'अदिति' की 'मानस पुत्री' हैं। इन्हें 'देवसेना' के नाम से भी जाना जाता है। चार दिनों तक चलने वाला इस छठ पर्व से 'राजा प्रियव्रत' की एक पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है।  इस पौराणिक कहानी के अनुसार 'छठ व्रत' यानि 'सूर्यपष्ठी व्रत' रखकर और विधि-विधान के साथ 'छठी माता की पूजा' करने के बाद 'राजा प्रियव्रत' का 'मृत' हो चुका 'पुत्र' वापस 'जीवित' हो गया था। रामायण और महाभारत में भी छठ पूजा से जुड़ीं कहानियां मिलती हैं!  छठ पर्व चार दिनों तक चलने वाला पर्व है ,यह नहाय खाए से शुरू होकर, खरना, संध्या अर्घ्य,  अंत में सूर्य भगवान को प्रात:कालीन अर्घ्यदान के पश्चात इसकी समाप्ति होती है !पुराणों के अनुसार जब ब्र...

What's the REAL Importance of Chhath Puja? (Chhath Puja Ka Rahasy Kya Hai -In English) Written By : - Devashish Sarkar

Chhath Puja is celebrated on the sixth day of the 'Shukla Paksha' of Kartik month, also known as Chhath Parva or Suryashathi Vrat, it is a big festival of faith. Which is started 6 days after Deepawali. According to religious beliefs, 'Shashthi Devi' is called 'Chhath Mata' in the local language, who is the 'Manas daughter' of sages 'Kashyap' and 'Aditi'. He is also known as 'Devasena'. A mythological story of 'King Priyavrat' is associated with this four-day Chhath festival.  According to this mythological story, after keeping 'Chhath Vrat' i.e. 'Suryashashthi Vrat' and worshiping 'Sixth Mother' with the law, the 'dead' 'son' of 'King Priyavrat' was 'alive'. Stories related to Chhath Puja are also found in Ramayana and Mahabharata!  Chhath festival is a four-day festival, it starts from Nahay Khae, Kharna, Sandhya Arghya, finally ends after morning Arghyadan to the S...

हम भारत के वीर बच्चे

हम भारत के वीर बच्चे, कर्मठ, ज्ञानी दिल के सच्चे  !  दुश्मन को तो कभी न बख्शें,  हमसे हारें अच्छे अच्छे !  प्राचीनतम इतिहास हमारा,  विश्व पटल पर सबसे न्यारा  !  अभिलाषा के आवेगों में,   हमको मिलता है किनारा  !   हम सभी को लेकर चलते , यह बच्चों की तनमयता है!  धर्मों की अनेकता में , भाषा की विशेषता है!  एक हैं हम सब भारतवासी, भारत माँ के हम विश्वासीविश्वासी !  कला संस्कृति की महिमा में,  बात हमारी अच्छी - ख़ासी  !  सबका हम सम्मान करे हैं,  नहीं यहाँ पर कोई पराया  !  देव , ग्रंथ और ऋषियों की,  इस धरती ने यही सिखाया  !  खनिज सम्पदा बहुतेरे हैं,  अमुल्य जंगलों के घेरे हैं  !  भारत के कूचे कूचे में,  हम सबके हैं वो मेरे हैं...!  नन्हें मुन्ने देश की खातिर ,  हरदम ही तैयार मिलेंगे...!  यहाँ मिसाले हिंदुस्तां में,  एक से बढ़ कर एक मिलेंगे...!  -- देवाशीष सरकार

बोली चिड़िया (कविता)

बोली चिड़िया चहक - चहक, फुदक - फुदकती बहक - बहक कितना सुंदर है संसार , रंग - बिरंगा यह संसार  फूलों की है बगिया सारी पेड़-पौधे हैं सब गुणकारी झर झर - झर झर झरना बहता चहुओर फ़ैली हरियाली  खुशहाली का मौसम छाया हम सबके दिल को है भाया ऊँचे - ऊँचे पर्वत पर तो बादल जाके घर भी बसाया नदियाँ बहतीं, झरने गाते, धूप निकलती बादल छाते, कैसे रोकूं रोक न पाऊँ झूमें नाचे मन इठलाते चाँद सुहाने चमके तारे, हम सब नन्हें प्यारे प्यारे! सूरज चमका गर्मी लाया, ईश्वर ने इनको हैं सँवारे जीवों की है जीवनधारा, नील गगन का नहीं किनारा स्वर्णिम किरणों से खिल जाता प्रकृति का अनमोल नज़ारा प्रकृति का सम्मान करें हम  प्रेम के रंग में रंग जाएं हम आओ मिलकर गाएँ गीत, जिसमें हो सबका संगीत...!!!  -- देवाशिष सरकार

थिएटर फ़ोबिया - "फ़्लैश बैक"(कविता - पार्ट : -- 1.)

  थिएटर फ़ोबिया - "फ़्लैश बैक" ( कविता - पार्ट : -- 1.) ---------------------------------- एक गुज़ारिश बार - बार है, सुनिए जी 'ज़िला - जवार'...! बुद्धिजीवी हम नहीं थे, हम तो सीधे - साधे थे'गंवार'...!!     'गुस्ताख़ी' को माफ़ करना,     हे हितकर , 'गुणीजण' मेरे...!     बातों को जो बुन रहा हूँ,     दिल में बसे जो बहुतेरे...!!       'नाट्यविधा' से 'प्रेम' हुआ था,   'चरमसीमा' के मौसम में...!   'पालकी' , 'माटी - गाड़ी' होता,   ज़ुबाँ - ज़ुबाँ पर 'ऑसम' में...!!   मंच रमें थे 'सतीश बाबू' ,   'बैट' में थे 'मुखर्जी बाबू'...!   देख मेरे दिल में तब आया,   दे दूँ मैं भी 'अर्ज़ी' बाबू...!!   'बैट - मेट' में सब 'सेटिंग' था,   भारी था, "कला - संगम"...!   भईया मैं किसके संग बैठूँ...?   बन 'बिसरा' था तब 'जंगम'...!!        बड़े - बड़े 'कला के पंडित',  माहिर भईया 'सुलभ जी'...!  काम मिलना बड़ा कठीन था,   का 'कोरस' में 'झुलब' ज...