माँ ऐसी ही होती है...,
माँ ऐसी ही होती है...,
आँखें खोले सोती है...!
कुछ भी वो बनाए खिलाए,
अमृतमयी सी होती है !
उसके आँचल की महक में,
हर पीड़ा जा खोती है...!
माँ ऐसी ही होती है....
जिसकी गोद बड़ी सुखदायी,
हम कहते थे 'माई - माई'...!
जिम्मा भक्ति,और सलीके,
धीरज,बोली, हिम्मत, सीखें,
सब कुछ हममें बोती है !
माँ ऐसी ही होती है....
रूठ गए तो झींगा मुश्ती,
मुझे मनाने करती कुश्ती...!
मेरे पग - पग, हर शैतानी,
कर देती वो पानी - पानी...!
थक जाने - बोझिल होने पर,
तन्मयता सँजोती है...!
माँ ऐसी ही होती है....
-- देवाशीष सरकार
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