माटी का बना हूँ ...

 माटी का बना हूँ ...

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माटी का बना हूँ ...

'मटमैला' समझना, मुझे

'संगेमरमर' का 'बुत'

तो ना 'बन' पाऊँगा मैं...


'धरती' की 'ओज' से 'पैदा' हूँ,

'अडिग' और 'अटलबाज़' हूँ ...!

'सख़्त' पत्थरों सा 'बन' गया हूँ,

'मौसमी', 'ज़द्दोज़हद' हूँ , मैं...!!


'खाँटी' , 'बावला' भी हूँ ...,

'खुड़दुड़ा' समझना, मुझे...

'लख़्त-ए-जिगर' का

'खूँ' तो ना बन पाऊँगा , मैं...…


           'माटी' का बना हूँ ...

          'मटमैला' समझना, मुझे

           'संगेमरमर' का 'बुत'

           तो ना 'बन' पाऊँगा मैं...


दुनियाँ के 'अज़िमोंशां', बादशाहों

'ज़राफ़ात' कतई नहीं हूँ !

मैं 'ताज़' हूँ बिना 'ताज़पोशी' के 

'ख़ुराफ़ात' कतई नहीं हूँ, मैं...!


'ढाल' सा बना हूँ ,

इस 'क़दर' मज़बूती है मिरी...

'गोले' बरसाते - 'नलियों' वाली

'तोप' तो ना 'बन' पाऊँगा, मैं...


          'माटी' का बना हूँ ...

         'मटमैला' समझना मुझे,

         'संगेमरमर' का 'बुत'

          तो ना 'बन' पाऊँगा मैं...


  -- देवाशीष सरकार

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