"होली की बयार...,साथ लिए प्यार...!!!"
"होली की बयार...,साथ लिए प्यार...!!!"
होली प्यार के रंगों में ढ़ल जाने का त्योहार है, जिसे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ मनाते हैं। होली , प्यार के रंगों में सजकर हमारे सामने आती है और यह पर्व को हर धर्म, संप्रदाय, जाति के लोगों में भाई-चारे का संदेश भी देती है।
होली के दिन हम सभी - अपने पुराने गिले-शिकवे को भूल कर एक - दूसरे को गले लगते हैं और प्रेमस्वरूप गुलाल भी लगाते हैं। बच्चे और युवा रंगों में रंग जाते हैं और मस्ती के धुन में रम जाते हैं।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को यह त्योहार मनाया जाता है। जिस पर्व के साथ अनेक कथाएं जुड़ीं हुई हैं।
होली के एक रात पहले होलिकादहन होता है अर्थात होलिका को जलाया जाता है। जिसके पीछे एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है।
भक्त प्रह्लाद के पिता हरिण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानने लगे थे। जो भगवान विष्णु के विरोधी थे जबकि उनका बेटा प्रह्लाद विष्णु भक्त थे।
सो, हरिण्यकश्यप ने प्रह्लाद को विष्णुजी की भक्ति करने से रोका और जब विष्णु भक्त प्रह्लाद इस बात को नहीं माने तो उन्होंने प्रह्लाद को मारने का प्रयास किया।
आखिरकार भक्त प्रह्लाद के पिता हरिण्यकश्यप ने अपनी बहन 'होलिका' से मदद मांगी।
'होलिका' को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका अपने भाई की सहायता करने के लिए तुरन्त तैयार हो गई। अतएव, होलिका , भक्त प्रह्लाद को लेकर एक चिता में जा बैठी परन्तु भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गया और हरिण्यकश्यप की बहन 'होलिका' आग में जलकर भस्म हो गई।
यह बात संकेत करती है की बुराई पर अच्छाई की जीत अवश्य होती है। इसलिए परंपरा अनुसार , आज भी फागुन मास के पूर्णिमा के दिन रात को या शाम को ही, 'होलिकादहन' की जाती है मतलब होली जलाई जाती है ; और उसके अगले ही दिन सभी लोग , एक - दूसरे पर गुलाल, अबीर लगाकर ,ख़ुशी से गले मिलते हैं और 'होली' का त्यौहार मनाते हैं !
इस दिन लोग प्रात:काल से ही उठकर रंग - बिरंगे रंगों में 'मशगूल' हो जाते हैं ! फ़िर अपने नाते-रिश्तेदारों व मित्रों के घर जाते हैं , उनको मीठे मालपुआ - गुजिया इत्यादि खाते एवं खिलाते हैं और साथ - ही - साथ जमकर होली के रंगों में रम जाते हैं।
बच्चों के लिए तो यह त्योहार विशेष महत्व रखता है। वह एक दिन पहले से ही बाजार से अपने लिए तरह - तरह की पिचकारियां व गुब्बारे लाते हैं और गुब्बारों व पिचकारीयों में रंग डालकर अपने मित्रों और रिश्तेदारों के साथ होली का आनंद उठाते हैं।
इस दिन हर कोई - हर प्रकार से बैर-भाव भूलकर एक-दूसरे के साथ टोली बनाकर होली खेलने निकलते हैं !
दोस्तों हमेशा अच्छी क्वॉलिटी के रंगों को प्रयोग में लाना चाहिए और त्वचा को नुकसान पहुंचाने वाले रंगों से होली नहीं चाहिए। इस मनभावन त्योहार पर रासायनिक लेप व नशे आदि से दूर रहना चाहिए। बच्चों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, उन्हें बड़ों की निगरानी में ही होली खेलना चाहिए। दूर से गुब्बारे फेंकने पर आंखों को चोट पहुँच सकती है !
होली के दिन रंगों को आंखों व अन्य अंदरूनी अंगों में रंग जाने से रोकना चाहिए और इस मस्ती से भरे पर्व को मिलजुल कर मनाना चाहिए।
होलिका दहन के दिन, परिवार के सभी सदस्यगण उबटन (हल्दी, सरसों व दही का लेप) लगाते हैं। उबटन लगाने से सभी रोग व्याधी आदि दूर होते हैं , साथ - ही - साथ गांव के घरों से एक-एक लकड़ी लेकर होलिका में जलाने की प्रथा सभी प्रकार के विकारों का जलकर नष्ट हो जाना माना जाता है।
होली के त्योहार का एक पौराणिक इतिहास एवं एक धार्मिक परम्परा है...! हमें इसकी मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, मानवीय मूल्यों के आधार पर होली का त्योहार मनाना चाहिए !
" तो दोस्तों...,
ब्रज की होली, मथुरा की होली, वृंदावन की होली, बनारस की होली, काशी की होली, मुम्बई की होली , कोलकाता ,गुजरात,पंजाब की भी होली......छोटू की होली - मोटू की होली..., कोई बड़ा नहीं - न कोई छोटा है यहाँ... सबके लिए है यह हमारी - होली...!!!
होली रे होली...रंगों की होली..., प्यार में झूमों - गाओ ...
पूरे भारत की है होली...!"
भारत के विभिन्न राज्यों की होली
#ब्रजभूमि की लठमार होली
सारे जगत की अनूठी होली...
#मथुरा और वृंदावन की होली
की धूम 16 दिन तक छाई रहती है। लोग “फाग खेलन आए नंद किशोर” और “उड़त गुलाल लाल भए बदरा” आदि अन्य लोक गीतों को गाने और इस पावन पर्व के आनंद में डूब जाते हैं।
#महाराष्ट्र और गुजरात की मटकी फोड़ होली...,
महाराष्ट्र और गुजरात में होली पर श्री कृष्ण की बाल लीला का स्मरण करते हुए होली का पर्व मनाया जाता है। महिलाएं मक्खन से भरी मटकी को ऊँचाई पर टांगती हैं इन्हें पुरुष फोड़ने का प्रयास करते हैं और नांच गाने के साथ होली खेलते हैं।
#पंजाब का “होला मोहल्ला”
पंजाब में होली का यह पर्व पुरुषों के शक्ति के रूप में देखा जाता है। होली के दूसरे दिन से सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान “आनंदपुर साहेब” में छः दिवसीय मेला लगता है। इस मेले में पुरुष भाग लेते हैं तथा घोड़े सवारी, तीरंदाजी जैसे करतब दिखाते हैं।
#बंगाल की “डोल पूर्णिमा” होली
बंगाल और उड़ीसा में डोल पूर्णिमा के नाम से होली प्रचलित है। इस दिन पर राधा कृष्ण की प्रतिमा को डोल में बैठा कर पूरे गांव में भजन कीर्तन करते हुए यात्रा निकाली जाती है और रंगों से होली खेली जाती है।
#मणिपुर की होली
होली पर मणिपुर में “थबल चैंगबा” नृत्य का आयोजन किया जाता है। यहां यह पर्व पूरे छः दिवस तक नाच-गाने व अनेक तरह के प्रतियोगिता के साथ चलता रहता है।
# बिहार और उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड में फाल्गुन की पूर्णिमा से उड़ते गुलाल व ढोलक की ताल से शुरू होती है ! इसी प्रकार होली भारत के कोने- कोने में भिन्न - भिन्न प्रकार से हर्षोंल्लास के साथ मनाई जाती है। इस पर्व के आनंदउत्सव माना जाता है !
दोस्तों, उम्मीद है कि आप सभी को यह लेख अच्छा लगा होगा ! यदि सम्भव हो सके तो कुछ टिप्पणी या Comment ज़रूर करें - धन्यवाद...!!!
--देवाशीष सरकार
Happy Holi ❤️❤️
जवाब देंहटाएंAapko bhi...!!!
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