आज मगन मस्त पवन

आज मगन मस्त पवन,

मन में लहराए अगन  !

छंदों में प्यार खिले ,

फूलों के अंग - बदन  !!


बलखाई आज 'शमां',

मौज़ें बन, ताज़ 'जवां ' !

हर इक आवाज़ से ही ,

सिहरन हो जाए रवां  !!


आज मस्त शाम सुमन ,

बरसे - बरसाए नयन  !

बहका मदमस्त ह्रदय 

बिसरे हैं मोंह - वचन  !!


हम सब हैं कौन यहां ,

सब तो हैं मौन यहां...!

अपने कहलाए जो हैं,

भागे हैं छोड़ जहां...!!


आज पतन, मंद गठन ,

आदर्श नहीं है लगन ...!! 

ना है विचार मनन ,

दृश्यहीन है जन - जन ...!


-- देवाशीष सरकार.



टिप्पणियाँ

  1. मन हो जाये प्रसन्न, जो समक्ष यूँ गद्य प्रथम l
    ह्रदय पुलकित होकर, करें आंनदलोक विचरण लल
    ---अर्धन्दु भट्टाचार्य

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