मेरा सबूत

प्यार बढ़ता है,

उमड़ता है,

दहकता है...

तेरी याद आने पर ,

मचलता है...


जान लो तुम

मान लो तुम

कभी तुममें

कभी हममें

रह रहकर 

बहकता है...


इन्कार है तुम्हें,

बहुत ख़ूब...

यहीं गड़ा है मेरा ताबूत

किसी से क्या पूछना...

उखड़ जाऊँ तो

मिल जाएगा मेरा सबूत...


- देवाशीष सरकार.

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