सफलता की कुंजी


दोस्तों

आज मैं आपसे

एक मज़ेदार बात करने वाला हूँ,

जो विद्यार्थी भाई बहनों के लिए

ही कहा गया है...!!!



काक चेष्टा

बको ध्यानम्।

स्वान निन्द्रा

तथैव च

अल्पहारी,

गृहत्यागी,

विद्यार्थी  पंच लक्षणम्।


अब इसके भाव पर

यानि एक्सप्रेशनस् पर

आ जाता हूँ...


काक चेष्टा  -

मतलब विद्यार्थीयों को हमेशा

काक यानि

एक

कौए

की तरह मन में प्रवल चेष्टा

बनाए रखना चाहिए,

कभी भी हार नहीं मानते हुए,

उसे अपने प्रयास में

डटे रहना चाहिए !

जहां भी ज्ञान मिल रहा हो,

कुछ सीखने का मौका मिल रहा हो,

ठीक तरह से

हासिल कर लेना चाहिए। 


बको ध्याणं - 

यानी बक

माने बगुला,

अर्थात् बगुले की तरह

अपने ध्यान को लक्ष पर

एकटक लगाए रखना चाहिए,

जिस तरह बगुला

पानी में ध्यान लगाए बैठा रहता है

और पानी में मछली को देखते ही

बिजली की गति से  लपककर

पलक झपकते ही

शिकार कर लेता है,

उसी तरह हमारा ध्यान भी 

केवल अपने लक्ष पर होना चाहिए,

मतलब टारगेट पर ही रहना चाहिए,

उसी प्रकार झटके में

मौका मिलते ही ज्ञान को 

हासिल कर लेना चाहिए! 

यहाँ ध्यान का अर्थ

एकाग्रता से है

यानी

कौँनशन ट्रेशन से है,

अर्थात विद्यार्थीयों को अपना ध्यान

केवल ज्ञान प्राप्ति के लक्ष पर 

टिकाये रखना चाहिए।


अब स्वान निद्रा -

स्वान का अर्थ होता है,

कुत्ता,

जिस प्रकार एक कुत्ता

हल्की सी अहट मात्र से ही 

जाग उठता है !

उसकी नींद ख़त्म हो जाती है,

और  वह  कोई आलस

महसूस नहीं करता !

ठीक उसी भाँति

एक विद्यार्थी को भी,

आलस से दूर रहना चाहिए

एवं सदा ही सचेत रहना चाहिए!


अल्पहारी  -

अर्थात् एक विद्यार्थी को

हमेशा

कम खाना और

हल्का खाना खाकर ही जीना चाहिए!

ताकि,

उसकी पाचन क्रिया ठीक रहे,

यानि 

डाईजेस्टिव सिस्टम ठीक रहे

और वह स्वस्थ रह सके ,

उसके अंदर आलस कभी भी

घर नहीं कर सके ।


गृहत्यागी -

यहाँ गृहत्यागी से मतलब यह है कि ,

घर को त्यागने वाला

या

घर से दूर रहने वाला ही

पूरी लगन के साथ

पढ़ाई से जुड़ सकता है!

अगर आप घर पर भी

पढ़ाई कर रहे हों तो

गृहस्थ जीवन को त्यागकर,

उसे भूलकर 

केवल पढ़ाई में ही

मन लगाना चाहिए !

यदि किसी विद्यार्थी को पढ़ने के लिये

घर से दूर भी जाना पड़े

तो ज़रा भी

संकोच नहीं करना चाहिए!

क्योंकि घर से दूर रहने पर

कोई भी विद्यार्थी

अपना ज़्यादा से ज़्यादा वक़्त

पढ़ाई को दे सकता है,

घर के माहौल में,

घर की सुख - सुविधा के कारण,

विद्यार्थी अपने लक्ष्य के प्रति,

ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है ।

इसलिए,

एक आदर्श विद्यार्थी को

गृहत्यागी अवश्य होना चाहिए ,

या कहें कि

यदि कोई घर में भी

पढ़ाई कर रहें हों तो,

घर की मोह माया

सुख - सुविधाओं को

भूलकर ही रहना चाहिए 


तो दोस्तों,

ये पांच लक्षण

जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है

या समझो बहुत ज़रूरी हैं!

यह बातें हम सबके लिए

एक लेशन है,

इनको टिप्स भी कह सकते हैं!

ये सफल होने के टिप्स हैं!

इन पांच लक्षणों को 

अमल करने पर

कोई भी विद्यार्थी संसार में या 

इस दुनियाँ में सफल हो सकता है!

और यह बात तय है

एवं यह निश्चित भी है! 


दोस्तों...

हम सभी विद्यार्थीयों से

यह गुज़ारिश करते हैं,

यह रिक्वेस्ट करते हैं कि,

इन पांच पॉइंट्स को ज़रूर अपनाएं

और  ज़िन्दगी में

क़ामयाब हो जाएँ ,

सफल हो जाएँ

यानि आपको सक्सेस मिले !


यह पांच लक्षण

सफलता की कुंजी है,

और क़ामयाबी की चाभी भी है!

इन पर क़ायम रहें ,

इन्हें आज़माएं ,

इनको फ़ॉलो करें!


एक बार फ़िर से,

इनको दुहराती हूँ

कृपया ध्यान से सुनें !!!


नंबर एक

कौवे की तरह

प्रयास में जुटे रहना ,


नंबर दो 

बगुले की तरह

ध्यान केंद्रित रखना ,


नंबर तीन 

कुत्ते यानि

डॉगी की तरह

हल्की नींद में सोना ,

एवं सदा सचेत रहना!


और नंबर चार

प्रतिदिन सादा भोजन

और हलका भोजन ही करना !


नंबर पाँच  -

गृहस्थ जीवन से दूर रहकर 

केवल पढ़ाई में ही लीन रहना ...!!!


दोस्तों,

अब आज बस इतना ही,

हम बच्चे ही

भारत देश के भविष्य हैं!

हमें जुझारू और

होनहार बने रहना चाहिए 


हम ही

इंडिया की शान है!


आओ साथ में मिलकर

अपने देश को आगे बढ़ाते हैं

और अपने

सुनहरे भविष्य के सपनों को

साकार करते हैं 

आई लव यू इंडिया,

आई प्राऊड टू बी एन इण्डियन,

जय हिन्द,

हिन्दूस्तान ज़िंदाबाद,

जय भारत,

भारतमाता की जय,

वन्देमातरम्,...

वन्देमातरम्...

वन्देमातरम्,...!!!


-- देवाशीष सरकार.


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