बोली चिड़िया (कविता)

बोली चिड़िया चहक - चहक,

फुदक - फुदकती बहक - बहक

कितना सुंदर है संसार ,

रंग - बिरंगा यह संसार 


फूलों की है बगिया सारी

पेड़-पौधे हैं सब गुणकारी

झर झर - झर झर झरना बहता

चहुओर फ़ैली हरियाली 


खुशहाली का मौसम छाया

हम सबके दिल को है भाया

ऊँचे - ऊँचे पर्वत पर तो

बादल जाके घर भी बसाया


नदियाँ बहतीं, झरने गाते,

धूप निकलती बादल छाते,

कैसे रोकूं रोक न पाऊँ

झूमें नाचे मन इठलाते


चाँद सुहाने चमके तारे,

हम सब नन्हें प्यारे प्यारे!

सूरज चमका गर्मी लाया,

ईश्वर ने इनको हैं सँवारे


जीवों की है जीवनधारा,

नील गगन का नहीं किनारा

स्वर्णिम किरणों से खिल जाता

प्रकृति का अनमोल नज़ारा


प्रकृति का सम्मान करें हम 

प्रेम के रंग में रंग जाएं हम

आओ मिलकर गाएँ गीत,

जिसमें हो सबका संगीत...!!! 


-- देवाशिष सरकार


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