वो कहते हैं...
वो कहते हैं,
वो हमारे, हम उनके नहीं हैं...!
कोई उनको समझाए
हम कब से वहीं के वहीं हैं ...!!
यह कैसी
नासमझी-ओ-मदहोशी
छाई है...!
क्या तिरे दिल ने
कोई और जगह भी पाई है...???
यूं तो सदियों से तुमसे
भाई का रिश्ता है
पर क्यूँ आज
कौन तुम्हैं खींचता है
अपनी नादानियों से
हवा का रूख़ मत मोड़ो
ग़र भाई समझे हो तो
अपने ईमान को अब जोड़ो
-- देवाशीष सरकार
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